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न करें दूसरों की बुराई वरना बनेंगे पाप के भागीदार, हो जाएगा सर्वनाश


 Abhay Shukla
शाहजहांपुर: समाज में किसी की पीठ पीछे बुराई करना बहुत गलत माना जाता है, लेकिन फिर भी आजकल ये चीज़ इतनी बढ़ गई है की कुछ कहा नहीं जा सकता। ज्यादातर महिलाओं में यह धारणा पाई जाती है। हमारे पुराणों में भी यह कहा गया है की किसी की पीठ पीछे बुराई करना बड़ा पाप है।

किसी की बुराई या निंदा करना एक सामाजिक बुराई है, जिसे लोग बुरी नज़र से देखते हैं। कई लोग दूसरों की बुराई करने वालों को पसंद नहीं करते हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों में इसे सबसे बड़ा पाप बताया गया है। न करें दूसरों की बुराई वरना बनेंगे पाप के भागीदार, हो जाएगा सर्वनाश, पढ़िए यह कहानी -

कहानी इस प्रकार है कि एक राजा के दरबार में ब्राह्मणभोज का आयोजन किया गया।
छप्पनभोग महल के खुले आंगन में बनवाए गए। उसी वक्त अनजाने में एक हादसा हो गया। खुले में पक रही रसोई के ऊपर से एक चील अपने पंजे में जिंदा सांप दबोचकर निकल रही थी। सांप ने चील के पंजों से छुटकारा पाने के लिए फुंफकार भरी और साथ ही जहर उगला। उसके मुख से निकली जहर की कुछ बूंदें पाकशाला में पक रही रसोई के व्यंजनों में गिर गईं।
जहरीले भोजन के खाने से सभी ब्राह्मण काल के गाल में समा गए। जब राजा को इस बात का पता चला तो ब्रह्महत्या के पाप ने उसको दुखी कर डाला। ऐसे में सबसे ज्यादा मुश्किल खड़ी हो गई यमराज के लिए कि आखिर इस पाप का भागी कौन है और ब्रह्महत्या के पाप के लिए किसको दंड दिया जाए।

सबसे पहला नाम राजा का आया, क्योंकि राजा ने ब्राह्मणों को भोजन के लिए आमंत्रित किया था। यमराज के मन में दूसरा नाम रसोइये का आया, जिसने ब्राह्मणों के लिए महाप्रसाद तैयार किया था। राजा को तीसरा ख्याल चील का आया जो सांप को पकड़कर ले जा रही थी। सबसे अंत में यमराज ने सांप के पाप पर विचार किया।

लंबे समय तक यमराज अनिर्णय की स्थिति में रहे कि आखिर ब्रह्महत्या का दंड किसको दिया जाए। घटना के कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने के लिए उसके महल में जा रहे थे। ब्राह्मणों ने एक महिला से महल का रास्ता पूछ लिया। तब महिला ने ब्राह्मणों को रास्ता बताते हुए कहा- 'देखो भाई जरा ध्यान से जाना। वह राजा ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है।'

जैसे ही महिला ने यह बात कही, यमराज ने फैसला कर लिया कि मृत ब्राह्मणों के पाप का फल इस महिला के खाते में जाएगा और यह दंड को भोगेगी। यमदूतों ने यमराज से पूछा- 'प्रभु ऐसा क्यों?' तब यमराज ने कहा- 'जब कोई व्यक्ति पाप करता है तो उसको पापकर्म करने में बड़ा आनंद आता है। ब्राह्मणों की मौत से न तो राजा को, न रसोईये को, न चील को और न ही सांप को आनंद आया। ये सभी इस अपराध से अनजान भी थे। महापाप की इस दुर्घटना का इस महिला ने जोर-शोर से बखान कर जरूर मजा लिया, इसलिए ब्रह्महत्या का यह पाप इसके खाते में जाएगा।'

अक्सर हम यही सोचते हैं कि हमने कभी कोई बड़ा पाप नहीं किया है, उसके बावजूद हमको किस बात का दंड मिल रहा है। यह दंड वही होता है, जो हम परनिंदा का पाप कर संचित करते रहते हैं।
इसीलिए हमें कभी जीवन में किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए वरना उससे ज्यादा हम उसके पाप के भागीदार बन जाते हैंं। सदैव जीवन में अच्छे काम करते रहना चाहिए और कभी किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए

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