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कोल सेक्टर में कमर्शल माइनिंग को छूट, 50 हजार करोड़ का भारी निवेश

नई दिल्ली
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज आत्मनिर्भर भारत की चौथी किस्त का ऐलान किया। आज का एजेंडा रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म रहा। उन्होंने कहा कि आठ सेक्टर्स में बदलाव के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं, इनमें से एक कोल सेक्टर भी है। वित्त मंत्री ने खनन के क्षेत्र में कई सुधारों की घोषणा की।
संरचनात्मक सुधारों पर जोर रहेगा
खनिज क्षेत्र में निजी निवेश की बढोत्तरी, विकास और रोजगार को बढ़ाने के उद्देश्य से संरचनात्मक सुधारों पर जोर रहेगा। सरकार ने कोल सेक्टर में कमर्शल माइनिंग को लागू किया है। इससे इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का भाव आएगा, पारदर्शिता बनेगी और काम में भी तेजी आएगी। यह रेवेन्यू शेयरिंग मैकेनिज्म पर आधारित होगा। इस सेक्टर में 50 हजार करोड़ का भारी निवेश भी किया जाएगा। 2023-24 तक कोल इंडिया के लिए लक्ष्य 1 अरब टन रखा गया है।
कोयले के आयात को घटाया जाएगा
वित्त मंत्री ने कहा कि कमर्शल माइनिंग का लक्ष्य कोयले के आयात को घटाना है। इस सेक्टर में घुसने के रास्ते को आसान बनाया जाएगा। शुरुआत में 50 कोल ब्लॉक को कमर्शल माइनिंग के लिए शुरू किया जाएगा। एलिजिबिलिटी की कोई क्राइटेरिया नहीं होगी। साथ ही 500 माइनिंग ब्लॉक की खुली नीलामी होगी।
बॉक्साइट और कोल मिनरल्स की संयुक्त नीलामी होगी
एल्युमिनियम इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बॉक्साइट और कोल मिनरल्स ब्लॉक की संयुक्त नीलामी की जाएगी। इससे एल्युमिनियम उद्योग को बिजली की लागत में कमी लाने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि खनन पट्टे के स्थानांतरण और अधिशेष खनिजों की बिक्री के लिए कैप्टिव (खुद के इस्तेमाल के लिए) और नॉन-कैप्टिव खानों के अंतर को समाप्त किया जाएगा। इससे दक्षता और उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा।

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