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16 साल पहले हुआ था ‘अम्फान’ का नामकरण, किसने सुझाया था नाम?

नई दिल्ली

कोरोना काल में देश के सामने एक और संकट खड़ा हो गया है। बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात ‘अम्फान’ अब सुपर साइक्लोन में बदल चुका है और तेज गति से पश्चिम बंगाल और ओडिशा की तरफ बढ़ रहा है। इसके बुधवार को तट से टकराने का अनुमान है। इस तूफान के कारण इन दो राज्यों में भारी तबाही की आशंका है। इससे निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं।
सवाल उठता है कि इस तूफान का नाम ‘अम्फान’ क्यों रखा गया है। तूफानों के ऐसे नाम रखने के पीछे क्या वजह है। दरअसल तूफानों का नाम रखने की जिम्मेदारी उस क्षेत्र के मौसम विभाग की ही होती है जहां से तूफान शुरू होता है। दुनिया में 6 रीजनल स्पेशलाइजड मेट्रोलॉजिकल सेंटर हैं। इसमें से भारत का मौसम विभाग (IMD) एक है। भारत तीन तरफ से समुद्र से घिरा है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले तूफानों के नाम की जिम्मेदारी भारत की ही है।
नामकरण की शुरुआत
अटलांटिक क्षेत्र में तूफानों के नामकरण की शुरुआत 1953 की एक संधि से हुई। हालांकि, हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने भारत की पहल पर इन तूफानों के नामकरण की व्यवस्था 2004 में शुरू की। इन आठ देशों में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, थाईलैंड और श्रीलंका शामिल हैं। साल 2018 में ईरान, कतर, सउदी अरब, यूएई और यमन को भी जोड़ा गया।
‘अम्फान’ नाम थाईलैंड ने दिया है और यह 2004 में सुझाए गए 64 तूफानों के नामों की मूल सूची में आखिरी नाम है। मौसम विभाग ने तूफानों के लिए 169 नाम पिछले महीने फाइनल किए हैं। इसमें सभी 13 देशों से 13 नाम शामिल हैं। आने वाले वक्त में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले तूफानों को दिए जा सकते हैं।

नाम रखने की मुख्य वजह
तूफानों के नाम रखने की मुख्य वजह है कि इनको लेकर आम लोग और वैज्ञानिक स्पष्ट रह सकें। काफी चर्चा में रहे तूफान हेलेन का नाम बांग्लादेश ने, नानुक का म्यांमार ने, हुदहुद का ओमान ने, निलोफर और वरदा का पाकिस्तान ने, मेकुनु का मालदीव ने और हाल में बंगाल की खाड़ी से चले तूफान तितली का नाम पाकिस्तान द्वारा दिया गया है।

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